Sunday, May 6, 2018

'धक्के मारकर बाहर' निकालने वाला बैंक

बेतिया (पश्चिम चम्पारण) सरकारी बैंक में ये पूछना गुनाह है कि ये मशीन खराब क्यों है? इस सवाल के बदले आपको धक्के मारकर बैंक 
से बाहर निकालने की धमकी दी जाती है। यहां तक कि थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की भी धमकी दी जाती है। मामला 4 मई का है। बेतिया के अजंता सिनेमा के पास स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में रुपया जमा करने वाली ऑटोमेटिक मशीन खराब पड़ी हुई है। ये मशीन कई सालों से खराब है। जिसके चलते ग्राहकों की बैंक में लंबी लाइन लगती है। ऊपर से बैंक कर्मी ये कहकर ग्राहकों की परेशानी और बढ़ा देते हैंकि लिंक खराब है। मशीन की खरीद पर कितना खर्च आया है? इसका खुलासा तो बैंक कर नहीं रहा  है। हां बैंक का गार्ड जिसका नाम रंजीत कुमार है, वहीं सिर्फ इतना बता रहा है कि चार-पांच बार इंजीनियर्स ने आकर इस मशीन को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन मशीन ने ठीक होने से मना कर दिया। लिहाजा इंजीनियर्स मशीन की बात मानकर वापस चले गए। काउंटर पर जाओ तो वहां लिंक फेल का बहाना बनाकर बैंककर्मी पैसा जमा या निकासी करने से मना कर देते हैं। ये सभी सही है बेचारे लगातार काम करते हैं लिंक फेल के बहाने ही सही तोड़ा सुस्ता लेते हैं। सुस्ती अच्छी होती है या बुरी, ये बहस का अलग मुद्दा है।
ये सरकारी बैंक उस देश में है जहांं जनता का राज चलता है। ऐसे में कोई भी ये पूछने का हकदार है कि आखिर ये मशीन खराब क्यों है? सरकारी बैंक को जहां अपनी सुविधाएं बढ़ानी चाहिए तो वहीं ये बैंक है जो खुद को बदलने का नाम नहीं ले रहा है। पीएम मोदी कितना भी दावा कर लें, उनके सरकारी कर्मचारी नहीं सुधरेंगे। वो 11 बजे से पहले बैंक नहीं आएंगे और 11.30 बजे से पहले काम शुरू नहीं करेंगे। लंच के नाम पर घंटों गायब रहेंगे और चार बजे के बाद किसी कीमत पर काम नहीं करेंगे। बड़ी हैरानी की बात है कि बैंक ऑफ इंडिया बेतिया शाखा से एक मशीन नहीं संभल रही ऐसे में कैसे उम्मीद की जाए कि ये बैंक दूसरे बैंकों के मुकाबले खुद को ज्यादा विकसित और अपने ग्राहकों को ज्यादा सुविधा दे पाएगा। 

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