Wednesday, May 2, 2018

सत्यजीत रे: सिनेमाई पर्दे का जादूगर

2 मई 2018 महान फिल्कार सत्यजीत रे का जन्म दिवस है। इसी दिन 1921 को उनका जन्म हुआ था। सत्यजीत रे का बचपन कठिनाइयों में गुजरा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्हें फिल्मकार बनना था। लिहाजा 1943 में ग्राफिक्स डिजाइन की नौकरी करके अपने करियर की शुरुआत की और फिर वो उस धारा की ओर मुड़ गए जिसने उनकी पहचान बदल कर रख दी। सत्यजीत रे ने सिनेमा का ऐसा संसार रचा जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। सत्यजीत रे ने 1955 में पाथेर पांचाली बनाई और इस फिल्म  को काफी सराहना मिली। पाथेर पांचाली ने कई अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते । इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल में भी पुरस्कार मिला। पाथेर पांचाली के बाद सत्यजीत रे ने 1956 में फिल्म अपराजितो बनाई। इसके बाद उन्होंने 1959 में अपूर संसार बनाई। सत्यजीत रे ने देवी, महापुरुष, चारुलता, तीन कन्या, अभियान, कापुरुष और जलसाघर जैसी 37 फिल्में और डॉक्यूमेंट्री बनाईं। 1991 में रिलीज हुई फिल्म आगंतुक सत्यजीत रे की आखिरी फिल्म थी। सत्यजीत रे को कई सम्मान मिले हैं। विदेश में ऑस्कर से लेकर देश में दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिले हैं। 1992 में सत्यजीत रे के काम को देखते हुए उन्हें आस्कर का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया गया। भारत सरकार ने सत्यजीत को उनकी फिल्मों के लिए सम्मानित किया। 1958 में रे को पद्मश्री, 1965 में पद्मभूषण और 1976 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया। सत्यजीत रे ने 32 नेशनल अवार्ड भी जीते। भारत सरकार ने 1992  में सत्यजीत रे को भारत रत्न सम्मान से नवाजा। 23 अप्रैल 1992 को 71 साल की उम्र में सत्यजीत रे का निधन हो गया। लेकिन ये उनकी फिल्मों का करिश्मा है कि आज भी चाहे अकादमिक मंच हो या प्रोफेशनल एन्वायरमेंट, हर जगह सत्यजीत रे और उनकी बनाई फिल्मों की तारीफ होती है। छात्रों से लेकर प्रोफेशनल तक, सभी सत्यजीत रे की फिल्मों को देखकर सिनेमा को समझने की कोशिश करते हैं। आज सत्यजीत रे का 97वां जन्म दिवस है। ये सिनेमा में सत्यजीत रे का योगदान ही है कि जब-जब सिनेमा की बात होती है तो बड़े अदब के साथ सत्यजीत रे को याद किया जाता है।

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