Thursday, May 3, 2018

3 मई से शुरू हुआ था फिल्मों का सफर

                                                            भाग-1
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 3 मई काफी अहम स्थान रखता है। भारत की पहली फिल्म राजा हरिश्चंद्र को इसी दिन 1913 में रिलीज किया गया। इस फिल्म का निर्देशन और निर्माण दादा साहेब फाल्के ने किया। ये एक मूक फिल्म थी और ये पौराणिक कथा पर आधारित फिल्म थी। यहां आपको बता दें कि सन 1913 से लेकर 1930 तक करीब 1300 मूक फिल्में बनी। फिल्म राजा हरिश्चंद्र में तारामती की भूमिका अन्ना सालुंके नाम के एक बावर्ची ने निभाई थी। उस समय महिलाओं को फिल्मों में काम करने की अनुमति नहीं थी। लेकिन दादा साहेब फाल्के ने हार नहीं मानी। उन्होंने फिल्म भस्मासूर मोहिनी का निर्माण किया। इस फिल्म में कमला गोखले और उनकी मां दुर्गा गोखले ने काम किया। इन महिलाओं को ही  भारतीय फिल्म जगत में पहली अभिनेत्री होने का गौरव प्राप्त हुआ था। 1917 में रिलीज हुई फिल्म लंका दहन पहली सुपरहिट फिल्म थी। इस फिल्म में अन्ना सालुंके ने राम और सीता के किरदार को निभाया था। फाल्के ने 1919 में कालिया मर्दन फिल्म बनाई । ये सभी फिल्में पौराणिक थी।
1926 में बेगम फातिमा सुल्तान ने बुलबुले परिस्तान नाम की फिल्म बनाई। बेगम फातिमा सुल्तान को पहली महिला निर्देशक होने का गौरव हासिल हुआ है। वर्ष 1931 से सवाक फिल्मों का निर्माण शुरू हो गया। इस साल करीब 200 मूक फिल्में बनी। लेकिन मूक फिल्मों के बीच सवाक फिल्मों ने दर्शकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया। आर्देशिर ईरानी की बोलती फिल्म आलमआरा 14 मार्च 1931 को मुंबई के मेजेस्टिक सिनेमा में रिलीज हुई। फिल्म के मुख्य कलाकार जुबैदा, मास्टर विट्ठल और पृथ्वीराज कपूर थे। इस फिल्म में 7 गाने थे। 1931 में कुल 22 हिन्दी फिल्में बनीं जबकि बांग्ला में 3, तमिल-तेलुगू में एक-एक फिल्म बनी। भारत में बनी इंगलिश भाषा की पहली फिल्म कर्मा है। जिसका निर्देशन हिमांशु रे ने किया था। 1933 में ये फिल्म बनाई गई थी जिसमें देविका रानी की भूमिका को काफी सराहा गया था। इस काल खंड की ज्यादातर पौराणिक थी। जिनमें शकुंतला, बजरंगबली और अयोध्या का राजा का नाम लिया जा सकता है। बोलती फिल्मों में 1934 में बनी फिल्म सीता, 1937 में बॉम्बे टाकिज की बनी फिल्म सावित्री उल्लेखनीय है वहीं प्रभात फिल्म कंपनी ने 1938 में गोपाल कृष्ण बनाई। 1942 में विजय भट्ट ने भरतमिलाप फिल्म बनाई। शांताराम ने 1943 में शकुंतला बनाई। 1949 में रामराज्य फिल्म बनाई गई। इसके बाद ऐतिहासिक फिल्मों का दौर आता है। जिसमें शिवाजी के जीवन संघर्ष पर 1928 में बनाई गई मूक फिल्म स्वराज तोरण का नाम उल्लेखनीय है। इस फिल्म को वी शांताराम ने बनाई थी। बाद में इस फिल्म में काफी काटछांट करके इसका नाम उदयकाल रख दिया गया। सोहराब मोदी ने 1939 फिल्म पुकार, 1941 में सिकंदर और 1943 में पृथ्वी वल्लभ बनाई। प्रभात फिल्म कंपनी ने 1944 में राम शास्त्री बना। वहीं वी शांताराम ने 1947 में मतवाला शायर रामजोशी बनाई। यहां बता दें कि भारत में प्रतिबंधित की जाने वाली पहली फिल्म भक्त विदुर है जो 1921 में बनी थी। 1937 में पहली रंगीन फिल्म किसान कन्या बनी । 1941 में ख्वाजा अहमद अब्बास ने  नया संसार नाम की फिल्म बनाई। 1943 में प्रभात टॉकिज ने फिल्म किस्मत बनाई। विमल राय की हमराही 1945 मे्ं आई वहीं चेतन आनंद की फिल्म नीचा नगर 1946 में प्रदर्शित हुई। 

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