Sunday, April 29, 2018

गर्मी में रहिए कूल-कूल'

उफ ये गर्मी, हाय रे गर्मी...ऐसे वाक्य न जाने कितनी बार आपने लोगों से सुने होंगे। आप खुद भी कई बार इन वाक्यों का इस्तेमाल कर चुके होंगे, लेकिन गर्मी से आपको राहत नहीं मिली होगी। क्या करें कुदरत का खेल ही ऐसा है। गर्मी से डरिए मत, न ही भागिए। ये प्रकृति का सच है। हां बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। जब पारा 45 पार कर जाए तो समझिए आफत सर पर है। जितनी गर्मी है उससे कई ज्यादा इंसान प्यासा घूम रहा है कि उसे चार बूंद पानी मिल जाए ताकि इस उफनती गर्मी में उसे राहत मिल सके। जो BPL कार्डधारी है उऩके पास फ्रिज, कूलर और एसी कहां से आएगा। बेचारे किसी पेड़ की छांव में या फिर अपनी झुग्गी में ही धूप के अत्याचार से बचने की कोशिश करते हैं। कई लोग ऐसे भी मिल जाएंगे जो ओवरब्रिज के नीच ओवरब्रिज की छांव में बैठकर या सोकर गर्मी को आँखें दिखाते हैं। ले आ क्या बिगाड़  लेगा तू ? पारा चाहे 40 के पार हो या फिर 45 के पास ऐसे लोग प्रकृति की छांव में रहकर गर्मी को ही चुनौती देते हैं। वैसे समाज में ऐसे भी लोग हैं जिनके पास अच्छा घर, एसी, कूलर और फ्रिज है। ऐसे लोग धूप में कड़कड़ाने के बाद जैसे ही घर में घुसते हैं सीधे फ्रिज से पानी निकाल कर गटक लेते हैं। वो ये भी नहीं सोचते कि फ्रिज का ठंडा पानी फिलहाल तो प्यास से राहत दे देगा, लेकिन अगले दिन गले की बैंड न बज गई तो फिर इस गर्मी के अस्तित्व पर ही सवाल उठ खड़ा हो जाएगा। कूलर एक तरह से ठीक भी है तो एसी, मत पूछिए। तत्काल कमरे में इंसान ठंडक के साथ सो तो जाता है लेकिन इसका असर दूरगामी होता है। आज जब पारा 40 या 45 के पार जा रहा है तो उसका जिम्मेदार ज्यादा से ज्यादा एसी और फ्रिज का इस्तेमाल है। हम प्रकृति से जितने दूर भा रहे हैं मुश्किलें उतनी ही बढ़ती जा रही है। आइए अब गर्मी से बचने के लिए प्रकृति के साथ दोस्ताना संबंध बनाकर जीना सीखें। यदि आपको धूप की वजह से ज्यादा प्यास लगती है तो घर में मिट्टी का बना सुराही में पानी भरकर रख लीजिए। ये आपको फ्रिज से भी ज्यादा ठंडा पानी देती है। ये पानी आपको नुकसान भी नहीं पहुंचाएगी। अपने घर के आसपास ज्यादा से ज्यादा संख्या में पेड़-पौधे लगाए। इनकी हरियाली में इतना दम है कि ये गर्मी के असर को काफी कम कर देती है। जरा सोचिए गांव में पोखर होता है उसके किनारे बरगद का पेड़ होता है और उसके नीचे गांव की मंडली बैठती है। इस मंडली में जमकर हंसी-ठिठोली होती है क्योंकि पोखर और बरगद दोनों मिलकर इस मंडली के लिए ठंडे वातावरण का इंतजाम करते हैं। चलिए आप भी गर्मी से बचने के लिए प्रकृति के पास जाइए और गर्मी के इस मौसम में रहिए बिल्कुल कूल-कूल।  

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