Saturday, April 28, 2018

चीन से दोस्ती, सावधानी जरूरी

जब-जब भारत ने चीन से दोस्ती की है तब तब ये दोस्ती काफी महंगी पड़ी है।
साभार:PIB
भारत दोस्ती के जरिए विकास और अमन चाहता है तो वहीं चीन इस दोस्ती के छलावे में भारत की सीमाओं पर अतिक्रमण और दुश्मन पड़ोसी देश पाकिस्तान को सैनिक साजो-सामान सप्लाई करता है। चीन बहुत अच्छी तरह से जानता है कि पाकिस्तान आतंकी संगठनों को पनाह दिए हुए हैं लेकिन फिर भी चीन पाकिस्तान को ही अपना भरोसेमंद साथी मानता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति  शी जिनपिंग की ये दोस्ती की तस्वीर सिर्फ
तस्वीर न हो बल्कि हकीकत का वो पल हो जिसमें दोनों देशों के बीच दोस्ती के हाथ और मजबूत हो। लेकिन इसको लेकर भारत को सतर्क रहना होगा। क्योंकि चीन वो बला है जो बीच रास्ते में ही पीठ पर खंजर चला देता है। चीन की करतूत डोकलाम विवाद सामने है। ऐसे में फिलहाल चीन पर भरोसा करना खतरे से खाली नहीं है। हिन्दी चीनी भाई भाई के नारे के बीच देश ने वो हालात देखे हैं जिसकी कल्पना किसी भी भारतवासी ने नहीं की थी।  जापान हमारा सच्चा दोस्त हो सकता है लेकिन चीन नहीं । ये वही चीन हैे जिसने 20 अक्टूबर 1962 को लद्दाख और मैकमोहन रेखा के पार भारत पर अचानक एक साथ हमले शुरू कर दिए। चीनी फौज ने पश्चिम में जुशूल में रेजांग ला और पूरब में तवांग पर अवैध कब्जा कर लिया । हालांकि भारतीय जवानों ने अपने बलबूते चीनी सेना के पसीने छुड़ा दिए, लेकिन हथियारों में चीन भारत से ज्यादा उन्नत था लिहाजा वो भारत पर भारी पड़ा। 20 नवंबर 1962 को चीन ने युद्धविराम की घोषणा की, लेकिन इस युद्ध में चीन ने अक्साई चिन के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया। जो आज भी सीमा विवाद का एक महत्वपूर्ण कारण है। चीन को इतने से संतोष नहीं है वो अरुणाचल प्रदेश को अपने देश का हिस्सा बताता है जिसका भारत घोर विरोध करता है मगर चीन है कि मानता नहीं। अब पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति के रिश्तों के बीच कितनी मिठास बढ़ती है और उसका भारत-चीन संबंधों पर क्या असर पड़ता है? ये देखना जरूरी होगा। हालांकि भरोसाहीन इस देश के साथ विवाद होने के बाद भी व्यापारिक संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ा है। 2014 में चीन ने भारत में 116 बिलियन डॉलर का निवेश किया था जो अब बढ़कर 160 बिलियन डॉलर हो गया है। ये व्यापारिक संबंध और आगे बढ़ेगा जहां भारत की मंशा निवेश को बढ़ावा देने की है तो वहीं चीन को भारत में बहुत बड़ा बाजार दिखता है। ऐसे में मोदी और जिनपिंग की दोस्ती क्या रंग लाती है ? इस पर हर किसी की नजर होगी। 

No comments:

Post a Comment