Saturday, April 21, 2018

सीएम नीतीश देंगे 'हुनर' की सौगात

हर सपना हो साकार यही है नीतीश सरकार का विचार। दरअसल हर हाथ को हुनर मिल जाए तो फिर सपनों को हकीकत में बदलने में देरी नहीं होगी। शायद यही सोच कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान कर दिया है कि वो दो साल में एक करोड़ लोगों को हुनरमंद बनाएंगे। जदयू और बीजेपी की संयुक्त सरकार स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर हाथ को काम देने के लिए मुद्रा जैसी योजनाएं चला रहे हैं तो वहीं नीतीश सरकार कौशल उन्नयन के क्षेत्र में अपना पूरा ध्यान लगाए हुए हैं। जाहिर है 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद सबने यही कहा कि बिहार में बाढ़ और बालू ही बच गया है जिसके चलते गरीबी के दलदल से बिहार नहीं निकल पाएगा। हालांकि नीतीश सरकार ने राज्य के विकास के लिए कई अहम कार्य किए हैं, लेकिन सूरसा की तरह मुंह बाए बिहार की गरीबी और लाचारी सोचने पर मजबूर कर देती है। इन सबके बीच नीतीश का विजन काबिल-ए-तारीफ है। मगर यहां ये देखने वाली बात ये है कि पहले राजद का दामन थाम कर चुनाव लड़ने वाले नीतीश को उनके विकास कार्यों का सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने जिस तरह से पाला बदलकर फिर से बीजेपी का दामन थामा उसने सबको आश्चर्य में डाला। वो शख्स जो नरेंद्र मोदी से नफरत करता था उसने उसी नरेंद्र मोदी का दामन थाम लिया। जाहिर बिहार को विकास की पटरी पर तेज गति से दौड़ाना है तो फिर केंद्र सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। नीतीश कुमार शायद इस बात को समझ चुके थे। लिहाजा उन्होंने भाजपा से गठजोड़ कर राज्य की प्रगति को एक नई दिशा देने की कोशिश की है। दो साल में एक करोड़ लोगों को हुनरमंद बनाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इस कार्य को नीतीश सरकार किस तरह से अंजाम देती है ये देखना महत्वपूर्ण होगा। वरना विपक्षी भी कहीं नीतीश को घोषणावीर न घोषित कर दें। 

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