Monday, March 19, 2018

दरगाह में 'विकास' की चादर

साभार: PIB
17 मार्च  2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सौंपी गई चादर  अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती पर चढ़ा दी गई। पीएम मोदी ने ये चादर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को सौंपी थी जिसे नकवी ने दरगाह के सालाना उर्स के मौके पर दरगाह में चादर चढ़ाई। मोदी के इस कदम को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी ब्रिगेड  मुसलमानों को रिझाने के लिए ऐसा किया है। इसे मोदी के इमेज परिवर्तन  की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ इसी तरह के प्रयोग पाकिस्तान के साथ भी कर चुके हैं। लेकिन उसका उन्हें या देश को कोई फायदा नहीं मिला। बहरहाल इन सभी कवायदों का मुआयना करने पर ये साफ हो चला है कि मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास के नारे को अमलीजामा पहनाने की कवायद में जुटी है। यानि इसे बीजेपी वोटबैंक के रूप में भुनाना चाहती है। मगर उसे ये भी डर है कि कहीं उस पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप न लग जाए। ऐसे में उससे हिन्दू वोट छिटकने की आशंका बढ़ जाएगी। लिहाजा मोदी सरकार फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रही है। मोदी सरकार एक तरफ दरगाह के लिए चादर भेजती है तो दूसरी ओर हज सब्सिडी को खत्म करती है। सरकार सब्सिडी खत्म करने पर ये बयान देती है कि सब्सिडी की राशि से मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। ऐसे में निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि मोदी सरकार सिर्फ विकास के नाम पर हर वर्ग, हर जाति और हर धर्म के मतदाताओं को लुभाना चाहती है। मगर ये भी हकीकत है कि मुस्लिम वोटबैंक पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कब्जा है। ऐसे में विकास के नारे के साथ बीजेपी मुसलमानों को कमल के कितने करीब ला पाती है। इसके लिए लोकसभा चुनाव 2019 का इंतजार करना होगा, जिसमें मुस्लिम वर्ग मोदी सरकार को पास करती है या फेल ?

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