Friday, March 30, 2018

ये क्या हो रहा है सरकार ?

नकल के मामले में बिहार की ख्याति है! गुंडई के मामले में यूपी बदनाम है। इन दोनों राज्यों में विपक्ष इस तरह के विख्यात मामलों पर सारा ठीकरा राज्य सरकार पर फोड़ देता है और चट से इस्तीफा मांग लेता है। लेकिन इन दोनों राज्यों के  मुख्यमंत्री ऐसे बेशर्म हैं कि इस्तीफा देना तो दूर, इस मसले पर कुछ बोलना भी जरूरी नहीं समझते। 243 और 404 से आगे बढ़ते हैं और आपको ले चलते हैं 543 की ओर, जहां देश के प्रधान सेवक चौकीदारी कर रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि वो भी आम चौकीदारों की तरह रात को सो जाते होंगे तभी नीरव मोदी से लेकर सीबीएसई पेपर लीक मामले सामने आ रहे हैं। कांग्रेस के समय भी घोटालेबाजों की कमी नहीं थी। उस समय भी मनमोहन सिंह थे। साफ छवि के प्रधानमंत्री थे। भले वो कम बोलते थे लेकिन जो बोलते थे वो ठोस बोलते थे। वो सत्ता से दूर हो गए, मगर टूजी एस्पेक्ट्रम और कोयला घोटाले की आवाज आज भी सुनाई देती है। मगर देखने में आ रहा है कि धीरे-धीरे सारे घोटालेबाज अपना दामन साफ करने में लग गए हैं। नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बनकर अपने दफ्तर पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले वहां सफाई अभियान चलवाया। इसके बाद इस अभियान को उन्होंने पूरे देश पर थोप दिया। जनता भी बेशर्म निकली। लाख कहने के बावजूद भी इधर-उधर गंदगी करना नहीं छोड़ती। बेचारे प्रधानमंत्री भी क्या करते। 2019 का चुनाव जीतना जरूरी है लिहाजा स्वच्छता और गंदगी को देखने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चश्मा ही लगा दिया। अब इस चश्मे से जो भी देखेगा उसको इतनी तो समझ आएगी कि बापू को सफाई पसंद थी या गंदगी। जाहिर है जिस महात्मा ने अपने सत्याग्रह से देश में अंग्रेजों को सफाया कर दिया वो भला गंदगी को क्यों पसंद करेगा। मगर देश में अब भी वैसे लोगों की कमी नहीं है जो गंदगी से नफरत नहीं रखते। गंदगी उनके जीवन का आम हिस्सा है। अब चाहे ये गंदगी भ्रष्टाचार के रूप में भी हो सकती है। आखिर सीबीएसई की दसवीं और 12वीं का पेपर लीक हो गया और सीबीएसई के लोग सोते रह गए क्या ? मोदी राज में जेएनयू विवाद, हैदराबाद यूनिवर्सिटी विवाद, एफटीआईआई पुणे विवाद को लेकर तत्कालीन मानव  संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का मंत्रालय बदल दिया गया। जब देश में काानपुर समेत कई जगहों पर रेल हादसे हुए तो तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस्तीफा दे दिया। अब जब पेपर लीक हुआ है तो क्या मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर अपने पद से इस्तीफा देंगे? 

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