Thursday, March 22, 2018

कब तक शहीद होते रहेंगे जवान ?

कश्मीर के हलमतपोरा में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में 5 सैनिक शहीद हो गए वहीं चार घायल हुए। इस एनकाउंटर में 5 आतंकवादियों के मारे जाने का भी दावा किया जा रहा  है। कितने आतंकी मारे गए, ये पाकिस्तान का टेंशन है, लेकिन कितने भारतीय जवान शहीद हुए ये भारत की चिंता होनी चाहिए। यदि पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर यकीन करें तो स्थिति भयावह दिखती है। मानो सरकार इन सबसे निफ्रिक होकर सो रही हो। उरी सेक्टर में 18 सितंबर 2016 को हुए आतंकी हमले में 18 जवान मारे गए थे। दक्षिण एशिया टेररिज्म पोर्टल के आंकड़ों पर गौर करें तो 2007 में 121 जवान मारे गए। वहीं 2008 में ये संख्या 90 थी। 2009 में 78 सैनिक शहीद हुए। 2010 में 69 सैनिक मारे गए। 2011 में ये संख्या 30 और 2012 में घटकर 17 हुई। जबकि 2013 में ये संख्या 61 हो गई। 2014 में 51 और 2015 में 41 सैनिक मारे गए। 2016 में 64 भारतीय जवानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 2017-18 में स्थिति और भी निराशाजनक है। पाकिस्तान हर दिन सीजफायर का उल्लंघन करता है जिसमें भारत के सैनिक हताहत होते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के आतंकी कश्मीर में कत्लेआम मचा कर निकल जाते हैं और भारतीय सेना देखती रह जाती है। हालांकि सरकार दावा करती है कि उसने सेना को सरहद पर पाकिस्तानी सेना और कश्मीर में आतंकियों से निपटने के लिए सेना को पूरी छूट दे रखी है, लेकिन इस छूट का सार्थक परिणाम सामने नहीं आ रहा है। लिहाजा सैनिकों के शहीद होने की बढ़ती संख्या सरकार के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए और सरकार को इस दिशा में ठोस एवं सटीक रणनीति पर काम करना होगा। तभी कश्मीर आतंक के साए से निकल कर विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ेगा। 

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