Saturday, March 3, 2018

पीएम मोदी का डिजिटल तमाशा !

BSNL यानि भारत संचार निगम लिमिटेड। ये वो कंपनी है जिस पर सरकारी ठप्पा लगा  है। सरकारी दफ्तरों
के जितने भी गुण-अवगुण होते हैं वो  सभी इस कंपनी में है। बीएसएनएल देश के कोने-कोने में है, मगर तरक्की के रास्ते पर बड़ा सुस्त है। कनेक्शन लेने के लिए इसके दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते चप्पल और जूते घिस जाते हैं, लेकिन बाजार की प्रतिस्पर्धा में ये कंपनी फिसड्डी साबित हुई है। अब आते हैं असल मुद्दे पर। दरअसल बिहार के पश्चिम चंपारण के मुख्यालय बेतिया में भी इस कंपनी का दफ्तर है। बेसिक फोन लाइन का बिल जमा करना हो तो यहां के कर्मचारी कैश पेमेंट का फरमान सुनाते हैं जबकि उपभोक्ता अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड से बिल का भुगतान करना चाहता है, लेकिन कंपनी के लापरवाह कर्मचारी और अधिकारी उपभोक्ता की इस मंशा पर पानी फेरते आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया की तरफ कदम तो बढ़ा दिए हैं, लेकिन उनको ये भी देखना होगा कि उनके संस्थान की उनके प्रयासों का एक तरह से विरोध कर रहे हैं। पूछताछ करने पर कर्मचारी बस यही बताते हैं कि स्वीप मशीन खराब है। कुछ और जानकारी लेने पर बताया जाता है कि स्वीप मशीन को पटना बनने के लिए भेजा गया है। करीब साल भर से तथाकथित स्वीप मशीन की खराबी दूर हो रही है। साफ है BSNL का जो कुनबा है वो उस परंपरा से बाहर नहीं निकलना चाहता है। उसकी सोच डिजिटल इंडिया के इस युग में भी नहीं बदली है। इसकी सबसे बड़ी वजह वो मानसिकता है जिसमें सरकारी कर्मचारी किसी भी काम के लिए कम से कम चार या पांच बार अपने दफ्तर का चक्कर तो लगवा ही लेता है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि 'बिल का पेमेंट करना हो तो कैश भुगतान करो, वरना वापस अपने घर जाओ'।

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