Sunday, March 25, 2018

पिछड़ों का मसीहा सलाखों के पीछे

10 मार्च 1990 से 28 मार्च 1995 का समय बिहार की राजनीति में अच्छा-खासा दखल रहता है। इस काल में लालू प्रसाद यादव नाम का नेता बिहार के राजनीतिक पटल पर उभरता है और जल्द ही पिछड़ों का मसीहा बन जाता है। लालू का जन्म 11 जून 1948 को गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में हुआ था। यानि लालू प्रसाद यादव की वर्तमान उम्र 69 है। पटना यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले लालू प्रसाद यादव कानून की पढ़ाई करने के बाद भी कानूनी दाेंवपेंच में फंस जाएंगे। ऐसा कम से कम उन पिछड़ों ने नहीं सोचा होगा जिनके कल्याण के लिए लालू को जाना जाता है। लालू का जनाधार इतना ज्यादा और मजबूत था कि तत्कालीन चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को भी मानना पड़ा कि लालू एक लोकप्रिय नेता हैं। मगर एक दाग ने लालू की फजीहत करा दी। लालू यादव उस चारा घोटाले में फंस गए जिसे तब के समय में सबसे बड़ा घोटाला करार दिया गया। चारा घोटाले के चलते लालू प्रसाद को 1997 में मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी और अपनी जगह उन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को  मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा दिया। गौरतलब है कि लालू को पहले ही तीन मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है। चाइबासा कोषागार से 37.70 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में लालू को 5 साल की सजा हुई है। वहीं देवघर कोषागार से 89.04 लाख की राशि की अवैध निकासी के मामले में तीन साल 5 महीने की सजा हुई है। जबकि चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ रुपए की अवैध निकासी के मामले में लालू को 5 साल की सजा सुनाई गई है। लेकिन चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में सबसे बड़ी सजा सुनाई गई है। दुमका कोषागार से 3.76 करोड़ की अवैध निकासी के मामले में लालू को सबसे बड़ी सजा सुनाई गई है। दो धाराओं में लालू को अलग-अलग 7-7 साल की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही उन पर 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। अब जबकि घोटाले से जुड़े दो मामलों में फैसला आना अभी बाकी है। ऐसे में पिछड़ों के इस मसीहा का भविष्य दांव पर लग गया है। 

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