Thursday, March 22, 2018

क्यों तकलीफ हो रही है?

SC-ST प्रताड़ना निवारक कानून की कठोरता में सुप्रीम कोर्ट ने थोड़ी ढील क्या दे दी, राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को लपक लिया। विपक्ष सत्तापक्ष पर गुर्राया हुआ है वहीं सरकार कह रही है कि वो फैसले का अध्ययन करने के बाद मामले पर अपना जवाब रखेगी। दरअसल मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST कानून में जांच के बाद FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी नहीं करने का आदेश भी दिया है। जिसके बाद से दलितों के तथाकथित हितैषी इस फैसले से नाराज हो गए और सरकार से जवाब मांगने लगे। उनका आरोप है कि इस मामले पर सरकारी वकील ने सही तरीके से सरकार का पक्ष नहीं रखा जिसके चलते इस कानून की कठोरता कम की गई है। दलित प्रेमी उन तमाम राजनीतिक दलों से सवाल है कि क्या दिव्यांगों पर अत्याचार नहीं होते? क्या उनका मजाक नहीं उड़ाया जाता? क्या किसी गरीब के साथ भेदभाव नहीं होता है? सरकार को घेरने वाले उन सभी राजनीतिक दलों से अपील है कि वो संसद में खुलकर क्यों नहीं कहते कि दलित वोटबैंक उनका है। इस पर उनका कॉपीराइट है।लिहाजा इसके साथ छेड़छाड़ को वो कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसलिए वो इस कानून की कठोरता में कमी लाने के आदेश का विरोध कर रहे हैं। भारत का नागरिक होने के
बावजूद मुसलमानों को शक की नजर से देखा जाता है। यहां भी इस सच को झुठलाया नहीं जा सकता  कि मुसलमान भी किसी के वोटबैंक हैं। चाहे दलित हो या फिर अल्पसंख्यक, सबकी कहानी एक जैसी है। राजनीतिक दलों ने अपने स्वार्थ के लिए इन सबका मजाक बना रखा है। वोटबैंक वाले उन सभी राजनीतिक दलों को नसीहत है कि सिर्फ झुनझुना बजाने से कुछ नहीं होगा राजनीति का चश्मा उतारो और हकीकत अपनी आंखों से देखों कि देश में क्या हो रहा है। 

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