Saturday, March 10, 2018

विकास इसी का नाम है !

बिहार का विकास देखना हो तो पटना आइए। पर्यावरण की कीमत पर विकास हो रहा है। सरकार कह रही है
कि हम विकास कर रहे  हैं। विकास किस चिड़िया का नाम है वो ये दो कटे हुए पेड़ गवाही दे रहे  हैं। हालांकि तस्वीर में कटे हुए सिर्फ दो पेड़ ही नजर आ रहे हैं। लेकिन ऐसे कई पेड़ हैं जिन पर कुल्हाड़ियां चली हैं। उनका दर्द और आंसू सरकार के लिए कोई मायने नहीं रखते। सरकार पर तो मानो विकास का जुनून सवार है।  चाहे सड़क चौड़ीकरण की बात हो या फिर पैदल चलने का रास्ता बनाना हो । इन रास्तों  में ये अभागे पेड़ आ जाते हैं जिस पर बेरहम कुल्हाड़ियां चलती हैं मगर कहीं से कोई हलचल नहीं होती, कोई विरोध नहीं करता,  क्योंकि सबको पता है सरकार विकास कर  रही है। आम आदमी को तो ये भी नहीं पता कि वो जो सांस ले रहा है उसमें ऑक्सीजन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। मगर इस भूमिका को समझने के लिए न तो आम आदमी के पास समझ है और न ही खास आदमी के पास समय। नतीजा सड़कों के किनारे दिख ही रहा है। 

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