Wednesday, February 7, 2018

'आजतक' की हिन्दी

न्यूज चैनल आजतक, एंकर श्वेता सिंह और नेताओं की पंचायत। सेना लापरवाह हो जाए तो आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब हो 
जाते हैं। नेता लापरवाह होते हैं तो जनता कराह उठती है। अधिकारी लापरवाह हो जाए तो विकास योजनाएं फाइलों में दम तोड़ देती हैं। मीडिया लापरवाह हो जाए तो अर्थ का अनर्थ होते देर नहीं लगती। न्यूज चैनल आजतक की हिन्दी कैसी है? इस पर बहस करना उचित नहीं है। इस संस्थान में एक से एक दिग्गज हिन्दी के जानकार काम कर रहे हैं। लेकिन ब्रेकिंग न्यूज चलाने वाले जो भी पत्रकार भाई हैं उनसे आग्रह है कि वो जो भी टाइप करते हैं जरा उस पर एक नजर मार लें। कहने का मतलब ये है कि उनको थोड़ा समय अपने लिखे हुए वाक्यों और शब्दों पर देना  चाहिए। यानि उन्होंने जो लिखा यदि वो उसे दोबारा पढ़ लेते तो शायद ऐसी गलती नहीं होती। आश्चर्य तो ये है कि गलत वाक्य काफी देर तक चलता रहा और आजतक के किसी अधिकारी या पत्रकार की नजर उस पर नहीं पड़ी। यानि आप दूसरों के बाल की खाल निकालने में माहिर है, लेकिन खुद की गलती की जरा भी परवाह नहीं। हालांकि ये गलती कोई बहुत बड़ी गलती नहीं है जिसके लिए हंगामा खड़ा  हो जाए। जरूरत इस बात की है कि कोई भी हो चाहे पत्रकार हो, डॉक्टर हो या भी नेता-अधिकारी सभी सजग होकर अपना काम करेंगे तो शायद इस तरह की गलतियां नहीं होंगी और यदि होंगी तो शायद बहुत कम होंगी। 

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