Friday, February 2, 2018

सिर्फ एक सवाल: शेयर बाजार धड़ाम से क्यों गिरा ?

बजट 2018-19। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट की तारीफ की तो विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने बजट की आलोचना की। यही बजट यदि उनकी सरकार  का होता तो राहुल तारीफ करते नजर आते । खैर वो विपक्ष की भूमिका निभाने का अपना कर्तव्य निभा रहे हैं उस पर आपत्ति जायज नहीं है। प्रधानमंत्री कह दें कि यही मेरा विकास का मॉडल है तो उसको मानने में किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। अब देखना ये होगा कि इस विकास के मॉडल के केंद्र में कौन है? गरीब आदमी, किसान, युवा या फिर सीनियर सिटीजन या फिर कारोबारी।  या हो सकता है नौकरीपेशा भी इस मॉडल में शामिल हो। हेल्थ इंश्योरेंस से लेकर किसान क्रेडिट कार्ड तक, एकलव्य स्कूल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक, इसकी गूंज बजट भाषण में सुनाई दी। बजट में किसानों पर कुछ ज्यादा मेहरबानी दिखाई गई है। लाजिमी है जब देश में किसानों के फांसी पर चढ़ने का सिलसिला तेज हो जाए तो फिर सरकार को कुछ न कुछ ऐसा तो करना ही होगा जिससे किसान फांसी के फंदे से वापस निकल आए। बदहाली में जी रहा किसान इतना लाचार है कि वो अपने शरीर में अपनी आत्मा तक को नहीं संभाल पा रहा है। अभी तो आत्मा ही उसके शरीर से बाहर निकल रही है। उम्मीद की जानी चाहिए कि कम से कम इस बजट के बाद ये सिलसिला रुकेगा।  बजट देखकर ही समझ आता है कि बजट पर काफी होमवर्क किया गया है। लोकसभा चुनाव 2019 में होंगे, लेकिन उसकी तैयारी इस बजट में ही दिख गई। हालांकि ऐसे कई लोग हैं जो इस बजट को लोकलुभावन बजट नहीं मानते, लेकिन उनके मानने से क्या फर्क पड़ता है। हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ तो दे ही दिया है। ये बजट साफ संकेत दे रहा है कि मोदी सरकार को पूरा भरोसा है कि अगली बार उसकी ही सरकार बनने वाली है। ऐसे में बजट को इस तरह से तैयार किया गया है जिसमें विकास का खाका तैयार करने पर जोर दिया गया है। इस बजट में जितनी भी घोषणाएं की गई हैं, यदि वो अगले 6 साल में जमीन पर उतर गईं तो यकीन जानिए इस मॉडल के मुरीद आप भी हो जाएंगे। वैसे मुरीद होना अनिवार्य नहीं है । आपकी सहूलियत पर निर्भर करता है। आप किस वर्ग से आते हैं ये भी मायने रखता है। बाकी भाजपा की सरकार है तो समझिए बहार ही बहार है। अब आप ये मत पूछना कि अच्छे दिन कब आएंगे। इस बात का जवाब 2 फरवरी को शेयर बाजार ने दे दिया है।   

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