Sunday, January 28, 2018

ये रास्ते हैं विकास के ?

पटना के कुम्हार के पास ट्रांसपोर्ट नगर है जहां की ये तस्वीर है। तस्वीर में सड़क है, मगर सुविधाओं की जगह कठिनाइयां ज्यादा है। तस्वीर का सच ये है कि सड़क जर्जर है
और उस पर पानी जमा है। सड़क जर्जर क्यों है और उस पर पानी क्यों जमा है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इस रास्ते से सैकड़ों लोग रोजाना गुजरते हैं, लेकिन सड़क की हालत देख कर मन में ये भय समा जाता है कि कहीं इस रास्ते से गुजरने वाला इसकी बदहाली का शिकार होकर कहीं हमेशा के लिए न गुजर जाए। यदि ऐसा होता है तो फिर ऊंगली उस महकमे के ऊपर उठनी लाजिमी है जिसके भरोसे ये सड़क है। ऐसा लगता है पटना नगर नगम से लेकर पथ निर्माण विभाग तक सभी अधिकारी नींद में हैं। या यूं कहिए कि सोने का अभिनय कर रहे हैं और जनता उनके अभिनय से अभिभूत है। भूत इसलिए कि सड़क की जर्जर हालत उसे भूत बना सकती है। फिर तो ये इलाका डरावना हो जाएगा। लेकिन ये लेट से कही गई बात है। इस जर्जर हालत से ये इलाका वैसे ही डरावना हो गया है। लेकिन इस डरावनेपन से न तो पटना नगर निगम के अधिकारियों को डर लगता है और न ही पथ निर्माण विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ठंड की सिकुड़न से बाहर निकलना चाहते हैं। ठंड का मौसम आज है कल गर्मी सताने के लिए चली आएगी। लेकिन ना तो नगर निगम और न ही पथ निर्माण विभाग के लोग इस इलाके में आएंगे। आलम ये है कि इस इलाके का पार्षद कहीं नजर नहीं आता। उसे मालूम है कि इस समस्या को लेकर जनता उससे सवाल करेगी।ऐसे में वो क्या जवाब देगा? शायद उसके पास कोई जवाब नहीं है। इसलिए  वो इस इलाके से ही गुम है। ऐसा भी नहीं है कि बिहार में सड़कें नहीं बन रहीं। लेकिन जो बन रही हैं वो हाईवे हैं जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की भागीदारी है। नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स है तो यहां याद दिलाना जरूरी होगा कि सरकार रोड टैक्स भी वसूलती है। नगर निगम हर एक वार्ड से जो टैक्स वसूलती है क्या उस हिसाब से वो जनता को सुविधाएं देती हैं। शायद नहीं, क्योंकि लालफीताशाही के चलते फाइलें धूल फांक रही हैं और जनता परेशान हो रही है। 

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