Friday, January 26, 2018

विवादित भंसाली की विवादित 'पदमावत'

संजय लीला भंसाली की फिल्मों का सौंदर्यबोध गजब का होता है। लेकिन ये भी सच है कि संजय लीला भंसाली अपनी फिल्मों को लेकर विवादों में रहते हैं। 25 जनवरी 2018 को संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म पदमावत रिलीज हो गई। संजय लीला भंसाली की इस फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया गया है। राजपूतों ने इसे अपने सम्मान के खिलाफ और रानी पद्मावती का अपमान बताया है। बता दें कि जब रानी पद्मावती चितौड़ के राजा रत्न सिंह की रानी थी और उनकी सुंदरता अद्वितीय थी। अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मावती की सुंदर पर मोहित होकर चितौड़गढ़ पर आक्रमण कर दिया। इस भीषण युद्ध में राजपूतों ने खिलजी की सेना के पसीने छुड़ा दिए, लेकिन खिलजी की सेना के आगे राजा रत्न सिंह की सेना हार गई। इसकी खबर मिलते ही रानी पद्मावती अपनी 1600 सहेलियों के साथ जौहर कर लिया। यानि खुद को आग के हवाले करके भस्म हो गईं। यहां ये कहना जरूरी है कि सपने अच्छे भी होते हैं और बुरे भी।भंसाली ने अपनी फिल्म पदमावत के जरिए सपनों के संसार को रचने की कोशिश की है, लेकिन इस कोशिश में उनके सामने कई चुनौतियां थीं या हैं। मगर भंसाली ने इन चुनौतियों की परवाह नहीं की और फिल्म बनाकर रिलीज भी कर दिया। एक तरफ अभिव्यक्ति की आजादी को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा तो दूसरी और आस्था पर चोट का हवाला देकर करणी सेना विरोध पर उतर आई। कहीं फिल्म रिलीज हुई तो कहीं नहीं। लेकिन इतना तो तय है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शासन और प्रशासन सिने दर्शक और सिनेमा हॉल की सुरक्षा को लेकर लापरवाह नहीं होगा। रानी पद्मावती का इतिहास खंगालने के बाद अब जरा संजय लीला भंसाली के फिल्मी सफर पर नजर डाल लेते हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जिसमें संजय लीला भंसाली विवादों में आए हैं। 2013 में संजय लीला भंसाली की एक फिल्म आई थी जिसका नाम था गोलियों की रासलीला रामलीला। या तो संजय लीला भंसाली के पास फिल्म का टाइटल रजिस्ट्रेशन के लिए उपलब्ध नहीं होगा या फिर रामलीला को लेकर विरोध। इनमें जो भी हो संजय लीला भंसाली ने बड़ी चलाकी दिखाते हुए रामलीला के आगे गोलियों की रासलीला जोड़ दिया। इस प्रकार उनकी ये फिल्म रिलीज हो गई। उस समय भी आस्था को लेकर लोगों ने विरोध जताया था। फिल्म के कंटेंट और टाइटल का कहीं कोई मेल नहीं था। हां रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण अभिनीत इस फिल्म में दोनों के किरदारों की रासलीला जरूर देखने को मिली।  इसके बाद 2015 में भंसाली ने बाजीराव मस्तानी नाम की एक और विवादित फिल्म बनाई, जिसका मराठा समाज ने जबरदस्त विरोध किया। मराठा समाज ने संजय लीला भंसाली पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया। लेकिन अभिव्यक्ति की नाव पर सवार होकर संजय लीला भंसाली बाजीराव मस्तानी से आगे बढ़कर पद्मावती तक पहुंच गए। अब देखने वाली बात ये होगी कि इस काबिल डायरेक्टर का अगला शिकार कौन होता है या होती है ?

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