Thursday, January 25, 2018

स्वच्छता अभियान में 'आस्था'

बिहार में पान, गुटखा और तंबाकू खाना पुराना शौक है, लेकिन स्वच्छता अभियान नया-नया है। इस बीच
यदि स्वच्छता को बरकरार रखने के लिए यदि आस्था का सहारा लिया जाए तो उस पर क्या प्रतिक्रिया हो सकती है ? इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सीढ़ियों के किनारे दीवार पर अलग-अलग देवी-देवताओं के टाइल्स लगाए गए हैं ताकि आस्था के सहारे दीवारों पर थूकने की परंपरा का अंत हो जाए। बिहार के सरकारी भवनों का तो और भी बुरा हाल है। लेकिन दीवारों पर गंदगी के मामले में सरकारी और प्राइवेट दोनों बिल्डिंग समान रूप से शिकार हुए हैं। देश का नेतृत्व करने वाले और अपने को जनता का प्रधान सेवक बताने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान की जो शुरूआत की है। उसका बेहतर असर अभी तक देखने को नहीं मिला है। स्वच्छता के लिए आस्था को हथियार बनाना पुरानी तरकीब है। लेकिन एक बड़ा सवाल यही है कि ये तरकीब कितनी जायज है ? ऐसी कई दीवारें मिल जाएंगी जहां यदि देवी-देवताओं का चित्र नहीं है तो वो दीवाल थूकदान बन जाती है। कम से कम आस्था की इस तरकीब के सहारे आप एक कदम आगे तो बढ़ ही सकते हैं। मगर यहां अहम सवाल यही है कि लोगों की आदत कब बदलेगी। पान, गुटखा और तंबाकू को लेकर सरकार विज्ञापन जारी कर लोगों को सतर्क कर रही है। इस अभियान पर भारी रकम खर्च की जा रही है, लेकिन लोगों की पान, गुटखा और तंबाकू खाने की आदत छूट नहीं रही है। तंबाकू से लेकर सिगरेट तक, ये सभी सेहत के लिए हानिकारक हैं। फिर भी लोगों में इसको लेकर कोई जागरूकता नहीं है। लोगों को शायद मरना पसंद है, यही वजह है कि वो पान, गुटखा, तंबाकू और सिगरेट से परहेज नहीं कर पा रहे हैं। मगर वक्त का तकाजा है कि लोगों को अपनी ये गंदी आदत बदलनी होगी। वरना आस्था पर चोट भी लग सकती है।  

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