Friday, January 19, 2018

गंदगी के राज में आपका स्वागत है !

पटना जंक्शन के पास की गंदगी की गवाही ये तस्वीर दे रही है। इसे साफ करने की जहमत पटना नगर
निगम नहीं उठाता। क्योंकि उसे मालूम है कि आज वो इस जगह को साफ कर देगा कल फिर से इसी तरह की गंदगी और बदबू देखने और सूंघने को मिलेगी। लिहाजा वो भी चादर तान कर सो गया  है। यहां के लोग इतने दिमाग वाले हैं कि वो गंदगी से कभी नफरत नहीं करते। गंदगी से उनकी मोहब्बत देखनी हो तो आप पटना जंक्शन या हनुमान मंदिर के सामने वाले इलाके का एक बार दौरा कर लें। नाक पर रुमाल न रख लिया तो फिर कहिएगा। वैसे बिहार के लोग काफी हाजिर जवाब होते हैं। साफ-सफाई के बारे में पूछो तो वो यही कहते है कि हम गंदे हैं तो क्या हुआ, दिलवाले हैं। हंसना है तो हंसते रहो, हम तो अपना काम करते रहेंगे। बिहार में रहने वालों के भी गजब के तर्क होते हैं। एक बार लालू यादव ने पटना के सौंदर्यीकरण का प्रयास किया था। लेकिन ये बिहार है ऊपर से राज्य की राजधानी। बिहार के लोगों का गंदगी के प्रति मोहब्बत का जज्बा देख कर वो भी हार मान बैठे। उसके बाद शायद ही किसी राजनेता ने पटना के सौंदर्यीकरण को लेकर प्रयास किया होगा। यदि प्रयास हुआ भी होगा तो उस राजनेता का ध्यान पटना जंक्शन के सामने के इलाके पर नहीं गया होगा। जहां भारी संख्या में लोगों ने मूत्र विसर्जन करके इलाके को मूत्रालय का अड्डा बना दिया है। अब इससे इलाके में सौंदर्य नहीं झलक रहा तो इसमें मूत्र विसर्जन करने वालों की क्या गलती। भई बिहारी लोग इतने ज्ञानी होते हैं कि वो साहित्य में सौंदर्य ढूंढ लेंगे। उन्हें सौंदर्य को लेकर कोई इल्जाम मत लगाओ। तथाकथित बिहारी अपनी अलग जीवन शैली के लिए जाने जाते हैं। ये तस्वीर भी उसी जीवन शैली का हिस्सा है। भई अब तो पीने पर पाबंदी है। नीतीशजी इतने बेरहम कैसे हो गए ? उन्होंने बड़ी अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माना शराबबंदी करके उऩ्होंने अच्छा काम किया है। लेकिन उन्होंने उन बेचारों के बारे में जरा भी नहीं सोचा जो शराब के बिना जी नहीं सकते। अ्ब जी नहीं सकते तो इसमें सीएम साहब क्या कर सकते हैं। उन्होंने अपना काम कर दिया। अब आप जिम्मेदार नागरिक हैं तो सोच बदलिए। शराब को छोड़िए, गंदगी को छोड़िए, दहेज को छोड़िए, बाल विवाह को छोड़िए। यदि आप चाहते हैं कि राज्य के बाहर बिहार की अच्छी छवि बने तो आपको उन तमाम बुराइयों को छोड़ना होगा, जिसके आधार पर गैर बिहार वासियों ने 'बिहारी' शब्द का सम्मान घटा दिया है।  

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