Thursday, December 7, 2017

राजनीति इसी का नाम है !

चितौड़गढ़ की महारानी रानी पद्मिनी ने अपनी सेना की हार के बाद जौहर कर लिया। यानि खुद को आग के हवाले कर दिया। ये तब का युग था जब किसी व्यक्ति को लगता था कि उसे किसी इलाके पर राज करना चाहिए, तो उसने अपनी सेना बनाई और उस इलाके पर आक्रमण कर दिया। जिस इलाके पर वो राज करना चाहता था। इस विस्तारवादी मानसिकता के चलते भारत में कई युद्ध हुए। भले ही महाभारत और रामायण को पौराणिक दस्तावेज का दर्जा दिया जाता है,  लेकिन इन पर नजर डाले तो राज्य के लिए ही भाइयों  में युद्ध हुआ था। लंका को जीतने के लिए राम ने अपनी वानर सेना बनाई।अब इस आधुनिक युग की बात  करते हैं। जमाना बदला, राजशाही गई और लोकशाही आ गई। स्वरूप बदल गए, लेकिन मूल वही का वहीं रह गया। यानि आज के जमाने में किसी को राज करना हो तो सेना की जगह राजनीतिक पार्टी बनाएगा और जनता को मूर्ख बनाकर सत्ता की चाबी हथियाएगा। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भर दिया है। उनका जीतना तय है,  क्योंकि कांग्रेस में परिवारवाद नेहरू के जमाने से चला आ रहा है।वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का बेटा कांग्रेस का अगला अध्यक्ष बनेगा। इसको लेकर कहीं कोई ताज्जुब की बात नहीं है। राहुल का अध्यक्ष पद के लिए पर्चा दाखिल करना कोई असाधारण घटना नहीं है। राजपरिवार के तौर पर देखें तो मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान,  बाल ठाकरे कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनका परिवार वर्तमान समय का राजपरिवार है। ऐसे बहुत से उदाहरण मिल जाएंगे, जिसमें बेटा बाप की विरासत को संभाल रहा है। अब जब राहुल गांधी अपने पुरखों की विरासत को संभालने जा रहे हैं तो उस पर हैरान होने की कोई जरूरत नहीं है। बस उम्मीद करना चाहिए कि वो इस विरासत को सही और सफल तरीके से संभाल सकें। 

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