Tuesday, December 5, 2017

क्या यूपी का नक्शा गुजरात में फिट बैठेगा ?

वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है।
पीएम मोदी के इस राज में एक सवाल बड़ा अहमियत रखता है कि क्या गुजरात के चुनाव में भाजपा यूपी जैसा
साभार: PIB
करिश्मा दिखा पाएगी। शायद हां या फिर शायद ना। कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने हिन्दू कार्ड खेलकर सफलता हासिल की। यूपी विधानसभा में 403 सीटों में भाजपा और उसके गठबंधन ने 325 सीटें जीत कर इतिहास रच दिया। इस चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति काफी सटीक बैठी। अमित शाह ने जिस तरह से सपा और बसपा का पत्ता साफ किया है उसे चमत्कार ही कहेंगे। हिन्दू वोटबैंक को और मजबूत करने के लिए और उसके असर को उत्तर प्रदेश के साथ देश के दूसरे राज्यों में भी प्रभावी करने के लिए यूपी की सत्ता की चाबी गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ को दे दी गई। इस भगवाधारी योगी ने सत्ता की कुर्सी संभालते ही सरकारी मशीनरी में नई एनर्जी भरने का काम शुरू कर दिया। योगी ने साफ कर दिया कि जो कर्मचारी और अधिकारी कामचोर निकलेंगे, उन्हें सीधे नौकरी से हटा दिया जाएगा। अब जरा 182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा चुनाव की बात कर लेते हैं। यहां हार्दिक पटेल नाम का नौजवान अपनी जाति के लिए आरक्षण मांग रहा है। हार्दिक का साफ कहना है कि जो पार्टी उनकी जाति को आरक्षण देने का वादा करेगी, उसी पार्टी का वो समर्थन करेंगे। यहां गौर करने वाली बात ये है कि पटेल या पाटीदार गुजरात की कुल आबादी के एक-चौथाई हैं। जाहिर है वो गुजरात विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। दिल्ली विधानसभा का चुनाव भाजपा की रग को दुखाती है। गुजरात में भाजपा को डर लग रहा है तो वहीं कांग्रेस जीत की उम्मीद कर रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हैं हार्दिक पटेल। पटेल का पाटीदार समुदाय पर कितनी पकड़ है, उसके आधार पर ही वो गुजरात में किंग मेकर बन सकते हैं। कांग्रेस उनके पीछे दौड़ रही है क्योंकि उसे पाटीदार वोट चाहिए। वहीं बीजेपी सहमी हुई है कि कहीं हार्दिक के बहकावे में आकर पाटीदार वोट उसके हाथ से न निकल जाए। देखने वाली बात यही है कि गुजरात में जातिगत आरक्षण का मसला चुनाव में हावी होगा या फिर बीजेपी का हिन्दू कार्ड। इन सबके बीच गौरतलब है कि गुजरात पीएम मोदी और अमित शाह का घर भी है। लिहाजा इस बार के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। वरना यूपी का करिश्मा यूपी में ही रह जाएगा और देश के बाकी राज्यों में ये सोच विकसित हो जाएगी कि जो अपने घर में सुरक्षित नहीं है वो बाहर क्या सुरक्षा देगा?

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