Sunday, December 3, 2017

'ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे'

भारत-अमेरिका की दोस्ती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सशक्त विदेश नीति का नतीजा है। भले ही विपक्ष उन पर
साभारः PIB
केवल दुनिया घूमने का आरोप लगाता है। लेकिन इस वर्ल्ड टूर ने मोदी को ऐसी कूटनीतिक ब्यूहरचना रचने का मौका दे दिया है जिसके चलते अब चीन भारत को आंख दिखाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। आतंकियों का पनाहगाह बना पाकिस्तान कश्मीर हड़पने की मुहिम में अकेला पड़ता दिख रहा है। दिल्ली में मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के बीच चाय पार्टी से शुरू हुई दोस्ती गुजरते वक्त के साथ निरंतर मजबूत होती जा रही है। अब भले ही डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं, लेकिन उनकी नजर में भी भारत अमेरिका के लिए महत्व रखता है। सामरिक दृष्टि से देखें तो कभी अमेरिका और पाकिस्तान की दोस्ती से भारत चिंतित रहता था, लेकिन अब भारत और अमेरिका की दोस्ती से पाकिस्तान टेंशन में है। कभी रूस का करीबी रहा भारत अब अमेरिका के करीब ज्यादा दिखाई दे रहा है। इसकी चिंता  रूस को है, यही वजह है कि उसने चीन से दोस्ती बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान अपनी सामरिक परिस्थिति के लिए चीन पर निर्भर है। जाहिर है चीन ने यदि पाकिस्तान को धोखा दिया तो पाकिस्तान के लिए सामरिक क्षमता का विकास करना कठिन हो जाएगा। वहीं दक्षिण चीन सागर में चीन और अमेरिका के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। ऐसे में चीन के पर कतरने के लिए अमेरिका ने भारत का सहारा लिया है। सामरिक साझेदारी के तहत अमेरिकी सैनिक भारत की जमीन का इस्तेमाल कर सकते  हैं। हालांकि भारत के  लिए ये एक खतरनाक फैसला है, लेकिन भारत अपने आर्थिक हितों और आतंकवाद को देखते हुए ऐसे फैसले लेने का रिस्क उठा रहा है। भारत ने हर मंच पर आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठाई है। दुनिया के सभी देशों से आतंकवाद से लड़ने की अपील की है। यहां तक कि भारत ने कई बार पाकिस्तान से भी आग्रह किया है कि वो अपने यहां आतंकियों को पनाह न दें और जो आतंकी पाकिस्तान में रह रहे हैं। उनके खिलाफ पाकिस्तान कड़ी कार्रवाई करें, लेकिन पाकिस्तान है कि सुनता नहीं। उसे बस चीन की आवाज सुनाई देती है जो विस्तारवादी नीति के तहत अपनी विदेश नीति तैयार कर चुका है। भारत का अक्साई चीन का मामला हो या फिर डोकलाम का विवाद। चीन की काली नजर भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य पर टिकी है। चीन की काली नजर से भारत को बचाने के लिए पीएम मोदी ने भी अचूक विदेश नीति तैयार की है। अब भले रूस पाकिस्तान और चीन के करीब जा रहा हो, लेकिन उसके लिए भारत जैसा भरोसेमंद मित्र मिलना मुश्किल होगा, क्योंकि चीन चीन और पाकिस्तान भरोसे के लायक देश नहीं हैं। ये अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकते हैं। जैसा कि उत्तर कोरिया के मामले में देखने को मिल रहा है। उत्तर कोरिया परमाणु बम गिराने की धमकी देता है। जाहिर है ये धमकी विश्व शांति के लिए बड़ी चुनौती है। अफगानिस्तान की समस्या को सुलझाने की कोशिश, पाकिस्तान में रहे आतंकी ओसामा-बिन-लादेन का एनकाउंटर और आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगाने की लगातार अपील के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने कई विवादस्पद घोषणाएं की हैं, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप की सलाहकार और उनकी बेटी इवांका ट्रंप का भारतीय दौरा दोस्ती की ओर कुछ कदम चलने जैसा है। बराक ओबामा की तरह डोनाल्ड ट्रंप भी भारतीय हितों का ख्याल रखते हुए भारत और अमेरिका की दोस्ती को और मजबूती प्रदान करेंगे। दोनों देशों को विश्व शांति की दिशा में हाथ से हाथ मिला कर आगे बढ़ने की जरूरत है। तभी जाकर इस दोस्ती का करिश्माई नतीजा दिखाई देगा। 

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