Friday, December 15, 2017

ट्रिपल तलाक से समान नागरिक संहिता तक !

सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला और फिर सरकार ने बदल दी पूरी तस्वीर। मोदी कैबिनेट में ट्रिपल तलाक  मामले
साभार: PIB
को रोकने के लिए सहमति दे दी गई है। एक बिल की ड्राफ्टिंग हो चुकी है। कैबिनेट से पास होने के बाद ये संसद के पटल पर रखा जाएगा, उसके बाद राष्ट्रपति की सहमति मिलेगी। जिसके बाद मुस्लिम महिलाओं की बदल जाएगी जिंदगी। सरकार के इस कदम  को राजनीतिक चश्मे से देखने वाले बहुत से लोग है। इस मामले में नकारात्मक पहलू उतने मायने नहीं रखते जितने कि सकारात्मक पहलू को देखना जरूरी है। कैबिनेट में बिल को हरी झंडी मिलने के बाद अब ये बिल लोकसभा और राज्यसभा में डिबेट के लिए जाएगा। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक इस बिल पर चर्चा करेगा। जहां सत्ता पक्ष इस बिल की खुबियां गिनाएगा वहीं विपक्ष इस बिल में खामियां ढूंढेगा। कुछ संशोधन भी हो सकते हैं। बिल में कुछ जोड़ा भी जा सकता है। फिलहाल इस बिल को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं उनके मुताबिक तीन तलाक देना अब गैर जमानती अपराध हो जाएगा। शौहर और बीवी के इस मामले में कानून का दखल हो जाएगा। इस दखल से मुस्लिम महिलाओं का कितना भला होगा ये तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन इस बिल को लेकर उल्लेमाओं ने हाय-तौबा करना शुरू कर दिया है। उनके मुताबिक तीन तलाक पर बिल भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक चाल है। इस राजनीतिक चाल  के लपेटे में सरकार वो रास्ता तैयार कर रही है जो समान नागरिक संहिता की ओर जाती है। क्या संविधान के नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 44 को साकार करने की तैयारी हो रही है या फिर भाजपा मुस्लिम महिलाओं का समर्थन हासिल कर अपना वोटबैंक तैयार कर रही है। मंशा चाहे जो भी हो मुस्लिम महिलाओं को घर और समाज में सम्मान हासिल होगा। जो किसी भी तरह से बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। 

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