Monday, December 11, 2017

आसमान में अतिक्रमण: परिंदों का उड़ना हुआ मुश्किल !

बेतिया (पश्चिम चंपारण) शहर के गली मोहल्लों में सांस लेना मुश्किल हो गया है। लोग धड़ल्ले  से आसमान में अतिक्रमण कर रहे हैं और अधिकारी अतिक्रमण के खिलाफ एक नोट भी नहीं लिख पा रहे हैं। जिसका नतीजा है कि मोहल्लेवासी गली में धूप के लिए तरस रहे हैं। लोग इतने मतलबी हैं कि उन्होंने अपनी छत सड़क के ऊपर तक बढ़ा ली है। जिसके चलते सूरज की किरण सड़कों और गलियों में नहीं आ रही है। जिसके चलते गलियों में अंधेरा छाया रहता है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन बुजुर्गों को हो रही है, जो ठंड के इस मौसम में धूप की आस में अपने दरवाजे पर बैठते हैं और अंत में उन परिंदों की बेबसी कोई क्या समझेगा, जो आसमान में अतिक्रमण के चलते धरती पर चहलकदमी को तरसते हैं। अतिक्रमण के चलते मकानों की ऊंचाई भी इतनी बढ़ गई है कि परिंदें भी अब पर मारने से घबराते हैं। कुछ लालची लोग जमीन तो जमीन, आसमान में भी अतिक्रमण कर रहे हैं। प्रशासन है कि जान-बूझकर आंखें मूंद कर बैठा है। वह सब जानता है, लेकिन अनजान बना हुआ है। नगरपालिका ने मकान बनाने का नक्शा ले-देकर पास कर दिया, लेकिन उसके अधिकारियों और कर्मचारियों के पास इतना भी समय नहीं है कि वो मकान के निर्माण की निगरानी कर सके ताकि अतिक्रमण को रोका जा सके। इस मामले में पार्षद विरोध नहीं करेंगे, क्योंकि उन्हें वोट चाहिए। वहीं अतिक्रमण को लेकर अधिकारी क्यों लापरवाह हैं? इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।

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