Friday, December 1, 2017

एड्स ने किसको मारा ?

AIDS यानि एक्वायर्ड इम्यून डेफिसियेंसी सिंड्रोम हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों में HIV पॉजिटीव और एड्स के बारे में लोगों को जागरूक करना है। चाहे धरती का भगवान डॉक्टर हो या फिर समाज को कोई इंसान, एड्स का नाम सुनते ही उसके पसीने छूट जाते हैं। उसे लगता है कि ये छूट की बीमारी है, थोड़ी सी लापरवाही से कहीं वो भी HIV नाम के वायरस से संक्रमित न हो जाए। WHO ने भले ही आंकड़े जारी कर दिए हो कि भारत में HIV संक्रमित लोगों की संख्या में भारी गिरावट आई है। NACO यानि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की मेहनत रंग लाई है। NACO के जरिए अरबों रुपए बहाने का फल मिला है। लेकिन कागजों पर रेंगने वाले इन आंकड़ों पर आंख मूंद कर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि आंकड़े सदा बदलते रहते हैं। जमीनी हकीकत कुछ और होती है। HIV के संक्रमण के साथ कोई भी इंसान कम से कम 10 साल तो जीवित रह सकता है। अब तो रेट्रोवायरल दवाएं भी बाजार में आ गई हैं जिनसे HIV नाम के वायरस को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। दावा तो ये भी किया जा रहा है कि इन दवाओं के सेवन से संक्रमित व्यक्ति 50 साल भी जी सकता है। सरकार भी दावा करती है कि एड्स के मामले घटे हैं। लेकिन HIV संक्रमित लोगों की संख्या को लेकर जो अनुमान लगाए जा रहे हैं वो भयावह है। पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार को कितनी मशक्कत करनी पड़ी वो वही जानती है। पोलियो के खिलाफ जंग में सरकार ने काफी पैसा और समय गंवाया, तब जाकर अब सरकार को पोलियो से मुक्ति मिली है। सरकार NACO के जरिए HIV वायरस से लड़ रही है। इस पर भी समय और पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि आखिर कब सरकार को एड्स से मुक्ति मिलेगी?

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