Sunday, December 10, 2017

10 दिसंबर: विश्व मानवाधिकार दिवस

मनुष्य के जीने के लिए जिन बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होती है, उस जरूरत को मानवाधिकार कहते हैं। इस अधिकार को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन आबादी के हिसाब से नाकाफी है। इसी को देखते हुए हर साल 10 दिसंबर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। आइए मानवाधिकार के इतिहास पर नजर डालते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ में वर्ष 1948 मानवाधिकार की घोषणा की गई। इस घोषणा पत्र में मानव अधिकार से संबंधित  33 अनुच्छेद हैं। जिसके जरिये इस धरती पर बेहतर जिंदगी जीने का हक मिलता है। भारतीय संविधान मानव अधिकारों का पोषक है। संविधान के अनुच्छेद 14, 15,16,17 और 18 में समानता का अधिकार दिया गया है। इसी तरह अनुच्छेद 19 से 22 तक भारतीय संविधान नागरिकों को स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसके तहत  अभिव्यक्ति, रहने, घूमने और व्यवसाय करने की आजादी मिलती है।  अनुच्छेद  23 और 24 में शोषण के खिलाफ अधिकार दिया गया है।अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है।अनुच्छेद 29 से 30 तक सांस्कृतिक और शिक्षा संबंधी अधिकार दिए गए हैं। भारत सरकार ने बकायदा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना कर रखा है। आयोग हिरासत में मौत, फर्जी मुठभेड़ समेत मानवाधिकार के कई मुद्दों पर सुनवाई करता है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक उसे 6629 शिकायतें मिली हैं। जबकि 27848 मामले विचाराधीन हैं। मानवाधिकार हनन के ये आंकड़े गंभीर संकेत दे रहे हैं। चाहे कश्मीर हो या फिर पूर्वोत्तर के राज्य हों, सुरक्षा बलों पर मानवाधिकार के हनन के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में भारत सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में और सार्थक कदम उठाने होंगे।

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