Thursday, November 30, 2017

कब तक 'बेपटरी' चलेगी भारतीय रेल ?

ठंड का असर कह लीजिए या फिर रेलकर्मियों की लापरवाही, भारतीय रेल पटरी पर सरपट नहीं दौड़ पा रही
है। ठंड की वजह से भारतीय रेल सिकुड़ रही है। रेल के पटरी से उतरने की दुर्घटना के कई मामले सामने आ चुकी है। यहां तक कि तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेल दुर्घटनाओं को लेकर नैतिकता के आधार पर रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। पीयूष गोयल को नया रेल मंत्री बनाया गया, लेकिन हादसों का सिलसिला नहीं थमा। चाहे बास्को डी गामा पटना एक्सप्रेस ट्रेन हो या फिर  कलिंग उत्कल एक्सप्रेस, इन हादसों से न तो रेल प्रशासन और न तो सरकार ने सबक सीखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की दोस्ती जगजाहिर है। बुलेट ट्रेन का सपना साकार करने के लिए 1 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि लगाई जा रही है। इसमें जापान ने बुलेट ट्रेन के लिए भारत को 88 हजार करोड़ की राशि कर्ज के रूप में दी है जिसका ब्याज वो 15 साल के बाद 0.1 प्रतिशत के हिसाब से वसूलेगा।  इस कर्ज को भारत 50 साल में चुकाएगा। इतनी मदद मिलने के बाद पीएम मोदी ने अहमदाबाद से मुंबई के लिए बुलेट ट्रेन की नींव रख दी। मगर बड़ा सवाल यही है कि बुलेट ट्रेन लाने वाले मोदी जी देश में हो रहे रेल हादसों पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं, ऐसे में उनकी बुलेट ट्रेन यदि पटरी से उतरी तो हादसे का मंजर क्या होगा। ये सोचकर किसी की भी रूह कांप जाएगी। आनंद विहार टर्मिनल पर सामान की जांच करने वाली एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। उसकी मरम्मत कराने की सुध भी रेलवे को नहीं है। ट्रेन में किन्नरों का ग्रुप घुसता है और हजारों की वसूली करके निकल जाता है और रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाते हैं। ट्रेनों में तैनात सुरक्षा बल ऐसे मामलों में अंधे हो जाते हैं। उन्हें किन्नरों की वसूली नहीं दिखती है। इसी तरह ट्रेन में डाका डालने की घटनाओं को भी ये सुरक्षा बल नहीं रोक पाते हैं। जिसका नतीजा होता है कि दिन-ब-दिन ये घटनाएं घटित हो रही हैं। आनंद विहार टर्मिनल पर सुविधाओं को लेकर कोई भी यात्री संतोष जरूर जताएगा, लेकिन 60 फीसदी गरीब आबादी के लिए इस टर्मिनल पर महंगाई बहुत है। इस महंगाई के चलते गरीब आदमी ट्रेुन में चढ़ने के पहले सौ बार सोचता है। जब 26 मई 2014 में एनडीए की सरकार बनी। तमाम दावों के साथ सुरेश प्रभु को रेल मंत्री बनाया गया, लेकिन उससे रेलवे का कायापलट नहीं हुआ। उल्टे बीमार रेलवे और बीमार हो गया है। अब देखने वाली बात होगी कि नए रेल मंत्री पीयूष गोयल इस बीमार रेलवे में कितनी ऊर्जा फूंक सकते हैं ?

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