Wednesday, November 29, 2017

विरोध की आग में 'पद्मावती'

एक तरफ राष्ट्रवाद की हुंकार है तो दूसरी ओर रचनात्मकता पर बंदिशें। इस बीच पदमावती को  लेकर चल रहा
विवाद समाप्त नहीं हो रहा। कोई तथाकथित अति स्वाभिमानी शख्स फिल्म में पदमावती की भूमिका निभाने वाली फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की नाक काटने की धमकी देता है तो कोई फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली की गर्दन काटने वाले को एक करोड़ का इनाम देने की घोषणा करता है। मसला विरोध के स्तर का नहीं  है। जब-जब विवादित फिल्में प्रदर्शन के लिए सिनेमाघरों में आई हैं। उत्पातियों ने जमकर हंगामा किया है। रानी पद्मिनी  और अलाउद्दीन खिलजी का इतिहास  पढ़ने से पहले इस इतिहास को भी पढ़ना जरूरी है। फिल्मकार प्रकाश झा ने फिल्म आरक्षण क्या बनाई। पूरे देश में तहलका मच गया। दलित समुदाय को लगा कि फिल्म के जरिए उनका रिजर्वेशन छीना जा रहा है। लिहाजा उन्होंने पूरे दम-खम के साथ फिल्म का विरोध किया। अब महानायक अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म में सेंसर बोर्ड ने कितनी कैंची चलाई, ये तो पता नहीं है। हां इस फिल्म से जो विमर्श हुआ वो सिर्फ हंगामा बन कर रह गया। फिल्म् जब प्रदर्शित हुई तो कहानी कुछ और निकली। ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म जोधा अकबर में इतिहास से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी, लेकिन फिर भी लोगों का स्वाभिमान जाग उठा और सरकारों ने वोटबैंक की पॉलिसी से प्रभावित होकर फिल्म पर बैन लगा दिया। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने फिल्म देखने के पहले ही फिल्म को बैन करने की घोषणा कर दी। कुछ ऐसा ही भाजपा शासित राज्यों में सुगबुगाहट सुनाई दे रही है। संजय लीला भंसाली कमाल के डायरेक्टर हैं। कभी-कभी वो कुछ ऐसी क्रियेटिविटी कर जाते हैं जो पूरे देश को हिलाकर रख देता है। भंसाली की आनेवाली फिल्म पहले तो सेंसर बोर्ड से लौटा दी गई है। पहले इस फिल्म का रिलीज डेट एक दिसंबर रखा गया था, लेकिन सेंसर बोर्ड से पास नहीं  होने की वजह से फिल्म का प्रदर्शन टल कर 12 जनवरी हो गया है।  लेकिन विरोध टलने का नाम नहीं ले रहा है। इतिहास का पन्ना यदि पलटा जाए तो पता चलता है कि अलाउद्दीन खिलजी रानी पद्मिनी के सौंदर्य के बारे में सुन रखा था और रानी को पाने के लिए उसने चितौड़गढ़ पर हमला कर दिया। तब राजा रतन सिंह का चितौड़ पर शासन था। खिलजी और रतन सिंह की सेना आमने-सामने हुई। जंग जोरदार हुआ, लेकिन राजा रतन सिंह की हार हो गई। इसकी खबर मिलते ही रानी ने 16 हजार महिलाओं के साथ आग में कूद कर जौहर कर लिया। रानी का चरित्र कैसा था, वो ुजौहर की घटना से प्रमाणित हो जाता है। अब बात जरा अलाउद्दीन खिलजी की कर लेते हैं जिसका काल 1290 ई से 1316 ई तक इतिहास के पन्नों में दर्ज है। अलाउद्दीन खिलजी अपने चाचा तत्कालीन सुल्तान जलाउद्दीन खिलजी की हत्या करके खुद दिल्ली की सल्तनत पर कब्जा कर लिया। अलाउद्दीन खिलजी कितना चरित्रवान था, इसका अंदाजा चितौड़ पर आक्रमण करने से ही पता चलता है। सिर्फ एक महिला को वो भी दूसरे की पत्नी को पाने के लिए जो सुल्तान अपने हजारों सैनिकों की जान की बाजी लगा दें, उसका महिलामंडन करना उचित नहीं लगता। अलाउद्दीन खिलजी के इस आक्रमण ने चितौड़ की न जाने कितनी सांसों को सदा के लिए बंद कर दिया। प्रेम आक्रमण से पैदा नहीं होता। प्रेम पैदा होता है दया और स्नेह से। जिसकी अलाउद्दीन खिलजी में कमी थी। 

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