Monday, November 20, 2017

न लोग बदले, न सिस्टम बदला

(पटना) बिहार में परिवहन सेवा का क्या हाल है, इसका अंदाजा इस तस्वीर को देखकर लगाया जा सकता है।
राजधानी के सबसे व्यस्त सड़क बेली रोड या हड़ताली मोड़ पर इस तस्वीर को खींचा गया है। ये वो इलाका है जहां सरकार के नुमाइंदे रहते हैं। ये वो जगह है जहां प्रशासन की बैठकी होती है। ये वो जगह है जहां जनता अपनी मांगों को लेकर धरना देती रही है। ये वो जगह है जहां मजदूर अपने हितों के लिए हड़ताल करते रहे हैं। ये वो जगह है जहां भूख हड़ताल या आमरण अनशन तक होता रहा है। ये वो जगह है जहां से उठी आवाज सरकार को सुननी पड़ती है, लेकिन उस पर अमल कितना होता है ये अलग मुद्दा है। ये तस्वीर गवाह है कि शासन और प्रशासन  सुरक्षित यात्रा को लेकर कितना संवेदनशील है? बस की छत पर बैठे ये लोग इंसान हैं कोई सामान नहीं।बस की छत पर बैठकर यात्रा करने की इनकी मजबूरी है या शौक ? ये तो यही लोग बता सकते हैं, लेकिन उस कंडक्टर और खलासी से क्या अपेक्षा रखी जाए जो चंद पैसे कमाने के एवज में यात्रियों की जान खतरे में डाल देता है। नहीं ऐसा कतई नहीं होना चाहिए। लेकिन ऐसा हो रहा है। ये तो राजधानी की तस्वीर है। बिहार के कोने-कोने में लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर यात्रा करते हैं और प्रशासन कुंभकर्णी नींद  में सोया रहता है।  

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