Saturday, September 30, 2017

शिक्षा का व्यावसायीकरण

पश्चिम चंपारण (बिहार) का जिला मुख्यालय बेतिया आज भी नहीं बदला। हां बदला है तो वो है कोचिंग सेंटरों की बाढ़। ये तस्वीर जिले के सबसे बेहतरीन गिने जाने वाले महारानी जानकी कुंअर महाविद्यालय की दीवारों पर ये पोस्टर वर्तमान स्थिति का बयां कर रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि ये पोस्टर उस कॉलेज की दीवारों पर लगाए गए हैं जिसमें एक से बढ़कर एक विद्वान प्रोफेसर कार्यरत हैं। इन तस्वीरों को देख कर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि या तो प्रोफेसरों को पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं है या फिर उनकी काबिलियत ऐसी नहीं है कि छात्र और छात्राएं कोचिंग सेंटर का मोह छो़ड़ सके। सुबह से लेकर शाम तक शहर में ऐसे अनेकों कोचिंग सेंटर संचालित हो रहा है। जिसमें भारी संख्या में छात्र और छात्राएं पढ़ने के लिए जा रहे हैं। इन कोचिंग सेंटरों से किसी को नौकरी की उम्मीद है तो किसी को अच्छी तालीम लेकर घर की जिम्मेदारी संभालने की जल्दबाजी है। जल्दबाजी  में कोचिंग सेंटर खुलते जा रहे हैं और सरकार है कि शिक्षा की गुणवत्ता की ढोल पीट 
रही है।  कोचिंग एक्ट 2010 के जरिए बिहार सरकार शिक्षा की गुणवत्ता का दावा कर रही है। लेकिन कुकुरमुत्ते की तरह खुलते जा रहे कोचिंग सेंटर में भी शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। अभिभावकों को कोचिंग सेंटर्स की महंगी फीस देना कबूल है। लेकिन सरकारी संस्थानों की शिक्षण व्यवस्था पर भरोसा नहीं है। साफ है हर जगह शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है। वहीं शिक्षा विभाग है कि उसे शिक्षा का स्तर गिरने की जरा भी चिंता नुहीं है। यदि चिंता होती तो बेतिया जैसे शहर में बड़ी  संख्या में कोचिंग नहीं खुलते। यहां ऐसे कई सरकारी संस्थान है जहां छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराई जा सकती है। 

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