Friday, September 29, 2017

बाबा रे बाबा...!

'अंधा' है मगर विश्वास है।
'गुरु का ज्ञान' पास है। 
धर्म के मार्ग पर चलकर देखा।
नासमझ निकला इस जमाने में। 
मोक्ष की तलाश में निकला था। 
लेकिन 'पुण्य का शव' पास  है !
अध्यात्म में डूबा रहा ताउम्र ।
ईश्वर को  पाने की जिद थी।
मगर इसके लिए कीमत भी तय थी।
'गुरु की दुकान' में बिक रहा था ईश्वर ! 
कहना गलत नहीं  होगा ।
इंसान बन गया 'भगवान' !
करतूत ने बनाया हैवान । 
आस्था की शक्ति हुई कम !
संत का हुआ अंत  ?

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