Saturday, August 5, 2017

ये मनोनयन किस काम का ?

सांसद रेखा और सचिन तेंडुलकर का राज्यसभा से गायब रहना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। वैसे संसदीय नियम के मुताबिक संसद का सदस्य बिना सूचना के 60 दिनों तक संसद से गायब रहता है तो उसकी सदस्यता खुद-ब-खुद समाप्त हो जाती है। सबसे बड़ी बात ये है कि संसद के दोनों सदन हंगामे में डूबे रहते हैं। ऐसे में अभिनेत्री रेखा और क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर से ये उम्मीद करना कि वो संसद में हाजिरी दें और हंगामें के गवाह बनें या फिर हंगामा करने में सक्षम हो, तो हंगामा करें। संसद के तीन सत्र होते हैं बजट सत्र, मानसून सत्र और शीतकालीन सत्र। सदन में कामकाज सही तरीके से हो, दुर्भाग्यवश बिना हंगामे और शोर-शराबे के कोई काम होता नहीं। ऐसे में मनोनीत सदस्यों से उम्मीद क्यों? क्या सचिन और रेखा को भी सदन में आकर हंगामा करना चाहिए ? कम-से-कम सचिन और रेखा को देख कर ऐसा नहीं लगता कि वो सदन में हंगामा कर सकते हैं। यहां एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि जो मनोनयन राजनीतिक हित साधने के लिए किया गया हो, तो उसका हश्र यही होना है। सचिन और रेखा के सदन से गायब रहना हैरान करने वाली बात नहीं है। मगर हां, गीतकार और शायर जावेद अख्तर की तरह रेखा बाॅलीवुड और सचिन खेल जगत के लिए संसद में आवाज तो उठा ही सकते हैं। मगर दोनों ये भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में उन पर सदन से गायब रहने के आरोप तो लगेंगे ही। 

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